इंतज़ार

Image via Pixabay

किसी की यादों ने पकड़ा दी फिर कलम,

कुछ हसीन ख्वाब आँखों में लिए

कभी चल पड़े थे हम,

दीदार ना भी हुआ तो क्या था ग़म,

ना इंतज़ार और ना प्यार हुआ ख़त्म।

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