बेफ़िक्री

Image via Pixabay

हम आज भी बच्चे होते तो क्या बात होती,
बेफ़िकर ये दिन होते औरअनोखी रात होती,
हर हँसी होती फूलों सी नाज़ुक,
हर खेल में किलकारियों की साज़ होती।

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2 thoughts on “बेफ़िक्री”

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