ख़ामोशियाँ

मेरे दिल की दहशत से अंजान हैं लोग,उन्हें लगता है कितनी खामोशी है,पर इतनी अनकही बातें हैं,की हर खामोशी की ज़ुबान है। Do you like this Hindi quatrain? +4

बेफ़िक्री

हम आज भी बच्चे होते तो क्या बात होती,बेफ़िकर ये दिन होते औरअनोखी रात होती,हर हँसी होती फूलों सी नाज़ुक,हर खेल में किलकारियों की साज़ होती। Do you like this Hindi quatrain? 0

इंतज़ार

किसी की यादों ने पकड़ा दी फिर कलम, कुछ हसीन ख्वाब आँखों में लिए कभी चल पड़े थे हम, दीदार ना भी हुआ तो क्या था ग़म, ना इंतज़ार और ना प्यार हुआ ख़त्म। Do you like this Hindi quatrain? 0