मन

दिल की हर साज़ पे नाम तुम्हारा है,मन की हर आवाज़ में नाम तुम्हारा है,यूँ तड़पने की हमें आदत न थी,ज़िन्दगी में कभी इबादत न की,तुझे पाया तो खुशी से मगरूरखोया भी तो एक दस्तूर होगा,हमें किस्सा बनाना है या तेरा हिस्सा,अब तो बस ये काम तुम्हारा है। Do you like this poem? 0