यादें

एक झोंके सी आकर, रेत की परतें हटाकर,मन की सिमटी चादर में अरमान जगाकर,बीते पल में आशा के दीए जलाकर,ये यादें बेवक्त ही आ जाती हैं,भरी महफिल में तन्हा कर जाती हैं। कुछ ख़बर कहाँ कब होती है,जाने कौन पल याद बन जाएगा,जाने कौन वहीं छोड़ जाएगा,कब आँखें खुल जाएँगी,और नया सवेरा निकल आएगा। उन … Read more