कदम तू बढ़ने दे

पथ की धूप से हार कर क्यों थम गया तू,राह के काँटों से डर कर क्यों जम गया तू,ज़रा दूर तक देख और कदम तो बढ़ने दे,इन पैरों को ये धूप ज़रा सा और तू सहने दे। नहीं कोई साथी है तेरा यहाँ,बस तू और तेरी मंज़िल है जहाँ,माँ का आशीष ले चला अकेला था … Read more